अंगारों पर बैठी दुनिया,एक दूजे को कमतर आंक रही।
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क्रूर होती दुनिया,अब मानवता को धिक्कार रही।
अपर्णा शर्मा
March 3rd,2026
दो पंक्ति
कर्मों को दुत्कार कर
चाहता रहा अधिकार
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जबकि काबिल को भी
मिलता रहा तिरस्कार।
अपर्णा शर्मा
Feb.24th,26
परिधान और रिश्ते
कच्चे सूत से बने वस्त्रों को पहन कर खद्दर से मजबूत होते थे रिश्ते
खूब झटक,पटक के बाद भी उम्र भर निभाए जाते थे रिश्ते।
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जब से आया है नाजुक और कोमल रेशमी परिधानों का ज़माना
तब से विशेष रखरखाव के बाद भी, धीरे-धीरे दरक रहे हैं रिश्ते।
अपर्णा शर्मा
Feb.3rd,2026
