सावन में मन

अंतर्मन में मेघा बरस रहे
अंगना अब भी सूखा है
बादल खूब छाए घनेरे
आँगन आस में डूबा है।

अंधियारी संग छाए बदरा
जरुर बरस कर जाएगें
मौन खड़े वृक्ष,उपवन भी
जैसे तन-मन भी तर जाएंगे।

जाने कितने बरस है बीते
बिन बहनों के घर सूना है
बिटिया भी बहना ही होगी
मन बारिश सा बरसा है।
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कितने सावन चले गए
वो सावन कब आएगा
जब झूमेंगें मस्त मगन हो
मेघा प्यार बरसाएगा।
अपर्णा शर्मा
August 14th,2026

अधूरा कैनवास

जिंदगी के कैनवास पर
अनगिनत रंग बिखरते रहे
वक़्त के साथ-साथ कभी
निखरते रहे कभी बिखरते रहे।

जिंदगी में हर शख्स कुछ
सीखा कर चला गया
इसीबीच दोस्तों का भी दौर
गुबार बन कर उड़ गया।
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प्यार के वो अनमोल पल
सुनहरा रंग भर गए
जिंदगी के कैनवास पर
सुकून का रंग दे गए।

कभी थी स्याह सी जिंदगी
उड़ेली तब उम्मीद की रोशनाई
ऐसे ही रंगों के संग खेलते
हमने पूरी जिंदगी थी बिताई।
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अकेलापन का ये धूसर रंग
मानो जिदंगी करे बदरंगी
भिगोकर यादों की बारिश में
लगे यही सावन की बदली।

जिंदगी के अंत में आज भी
कैनवास अधूरा सा दिखा
अनगिनत रंग होते हुए भी
विश्वास का रंग न दिखा।
अपर्णा शर्मा
August 7th,2026

मंजिल

वो सफर में था और मैं इंतजार में
दोनों ही जुझते रहे अड़चनों से।
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सवाल था मिले आखिर कैसे मंजिल
वो था यथार्थ में और मैं ख़्याल में।
अपर्णा शर्मा
Aug.4th,2026

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