कभी तुम्हीं आईना थे
अब आईने में हो तुम
संवारता रहा मुझे आईना
उसमें दिखते रहे हो तुम।
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नयनों में गहराता काजल
यादों का लहराता बादल
सुर्ख होते गालों की लाली
आईना कहे सारी हालत।
केशविन्यास करुँ तब ये अलकें
न सुलझे,न संवरे ये काली जुल्फें
तेरी धुन पर करती ता ता थईया
आईने में ये अदा खूब ही झलके।
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प्रेयसी का बस एक निवेदन
सारे श्रृंगार तुझको ही अर्पण
आ जाओ,कहती ये धड़कन
शायद बोल उठे आज ये दर्पण।
अपर्णा शर्मा
Feb.6th, 2026
परिधान और रिश्ते
कच्चे सूत से बने वस्त्रों को पहन कर खद्दर से मजबूत होते थे रिश्ते
खूब झटक,पटक के बाद भी उम्र भर निभाए जाते थे रिश्ते।
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जब से आया है नाजुक और कोमल रेशमी परिधानों का ज़माना
तब से विशेष रखरखाव के बाद भी, धीरे-धीरे दरक रहे हैं रिश्ते।
अपर्णा शर्मा
Feb.3rd,2026
बापू और चरखा
चरखा संग्रहालय में यूँही जाना हो गया
जब वहाँ बैठे तो सुकून सा आ गया।
भांति भांति के चरखे, वहाँ सजे थे
विगत युग की वो गाथा कह रहे थे।
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स्वदेशीकरण के बीज़ बो कर स्वावलंबन सिखाया
विदेशी चुंगल से फिर देश को बाहर निकाला।
गांधी जी ने देश को अचूक हथियार दे दिया
जिससे देश आत्मनिर्भरता की दिशा में चल दिया।
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आज इत्तफाक से 30 जनवरी का ही दिन है
आज ही बापू की पुण्यतिथि का दिन है।
बापू आपको नमन , बारंबार नमन
विश्व में दी हमारी पहचान को नमन।
अपर्णा शर्मा
(Jan. 30th,2026), Jan.31st,26
