हमें खुद को नहीं पता कि हम क्या हैं?
और उसने हमारा पूरा किरदार गढ़ दिया।
अचरज कैसा ? आप भी बाहर आइए
देखिए! आप पर कितना कुछ लिख दिया।
हमें खुद को नहीं पता कि हम क्या हैं?
और उसने हमारा पूरा किरदार गढ़ दिया।
अचरज कैसा ? आप भी बाहर आइए
देखिए! आप पर कितना कुछ लिख दिया।
एक क्षण में पनपा, वो प्यारा एहसास.
जीवन भर रहता जिसका मन में वास।
प्रेम सागर में दो जन,होते जैसे एक जान.
चिर प्रेम,हृदय तल में,स्थिर हो,पाता मान।
अनवरत राही,से चलते रहते,प्रेमी प्रेम डगर.
चाह यहीं, साथ में पूर्ण हो,जीवन का सफर।
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प्रेम प्रसंग,लघु कहानियों का,बनता प्रेमागार
दो जने जुड़ कर,प्रेम को देते,मनोरम आकार।
प्रेम धारा में,निरंतर बहते जाना ही,तर जाना हैं
सम्पूर्ण प्रेम,राम कृष्ण को भी कहाँ मिल पाया हैं।
गणतंत्र दिवस और बसंत पंचमी का त्योहार
उल्लासित तन मन, बह रही मधुर बसंत बयार ।
पीली पीली सरसों,जैसे धरती पर सजी रंगोली
इन्द्रधनुषी पतंगों ने खुशियों में मिश्री घोली ।
धरती से अंबर तक फैली है नई ऊर्जा भरी तरंग
हर भारतीय के मुख पर छाई आनंद भरी उमंग ।
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गणतंत्र हमारा, कर्तव्य-अधिकार का बोध कराता
माँ भारती का अर्चन, ज्ञान का प्रकाश मार्ग दिखाता ।
बसंती चोला पहना जब वीरों ने,देश में गणराज है आया
बसंतपंचमी ने संग मे,आज गणतंत्र का मान बढ़ाया ।