मनुष्य को क्या ही खूब रचा है ईश्वर ने
हर पशु को थोड़ा-थोड़ा गढ़ा है उसमें।
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जब जैसी सुविधा देखे वो जीवन में
वैसा ही चरित्र दिखे उसकी सूरत में।
अपर्णा शर्मा
July 21st,2026
विरले
हर एक रिश्ते में सफल हो ऐसे व्यक्ति विरले ही होते है।
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गर हर रिश्ते में सफल हो तो अपने आप से दूर होते हैं।
अपर्णा शर्मा
July14th, 2026
शबनम की बूँदें
शीतल रातों में चाँद सी चमक ले कर
छा गई हर जगह चाँदनी सी बिखर कर
यहाँ, वहाँ सब ओर वो सितारों सी दिख रही
चाँदनी के तार से यादों के गलीचे काढ़ कर।
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उसको सामने देख रजनीगंधा महक रही
सभी श्वेत पुष्पों पर उसकी मौजूदगी दिख रही
हरसिंगार का सिंगार प्रकृति को सजा रहा
उसके स्वागत को धरा आसमाँ को निहार रही।
आई वो और आलिंगन से तृप्त कर दिया
हर पत्ते,फूल पर अपना स्पर्श अंकित कर दिया
फैलाया प्रकृति ने भी खोल कर जब बाहों को
रात का वचन दे उसने फिर निराश कर दिया।
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उसकी इस अदा पर प्रकृति ने मन को मसोसा
सभी श्वेत पुष्पों ने अपने को फिर से था समेटा
हरसिंगार उदास हो,जमीं पर था बिखरा
ये शबनम की बूँदे जैसे प्रेमियों के मन की आह।
अपर्णा शर्मा
July 10th,2026
