कौन है आप?
शिशु के जन्म के पश्चात,शिशु को एक नाम से पुकारा जाता है. छोटा बालक उस नाम को ही अपनी पहचान मानता है और प्रत्येक कार्य को करने के बाद कहता है कि यह अमुक ने कार्य किया है. शनैः शनैः घर में उसे परिचित कराया जाता है कि अमुक नाम तुम्हारा है और वह उस नाम को स्वयं का परिचय समझ लेता है. उम्र में वृद्धि के साथ साथ, बालक अपने नाम के निमित्त कार्य कलाप करता है जिस से सर्वत्र उसके नाम को पहचाना जा सके और समाज में प्रशंसनीय एवं सम्माननीय व्यक्तित्व कहलाए.
जीवन के किसी भी पड़ाव या मोड़ पर व्यक्ति को जब यह आभास होता है कि, क्या वह मात्र नाम ही है या कुछ और ?? तब वह वास्तविक पहचान हेतु चिंतन, मनन में लीन हो जाता है. अंत में उसे बोध होता है कि वह मात्र शरीर नहीं है बल्कि शरीर और आत्मा दोनों का मिलाजुला रूप है.अब तक जो भी उसकी पहचान है मात्र शरीर की जिसका नाम अमुक है.
तत्पश्चात,व्यक्ति अपने नाम के साथ अपनी अंतरात्मा की आवाज पर भी विचार करने लगता है. तब उसमे दैवीय गुण भी कार्य(परोपकार,सद्भावना,अहिंसा आदि) करने लगते हैं.इस प्रकार, एक व्यक्ति संपूर्ण व्यक्तित्व में परिवर्तित हो जाता है.
जब ऐसा व्यक्तित्व अपनी पूर्ण आयु कर इहलोक से परलोक को प्रस्थान करता है तब मात्र वह शरीर से ही प्रस्थान करता है जो कि नश्वर है परंतु अपने द्वारा किए गए नेक कार्यो से हमारे मध्य सदा ही विराजमान रहता है जो कि उसने अपनी आत्मा से अभिभूत हो कर किए थे.
सारांश यह कि व्यक्ति शरीर और आत्मा दोनों का मिलकर बना रूप हैं. आत्मा विचार को जन्म देती है और शरीर उसे कार्यान्वित करता है. शरीर की पूर्णता के पश्चात भी वह अपने कार्यो में सदैव जीवित रहता है क्योकि आत्मा अजर अमर है.
अपर्णा शर्मा Feb.17th,2026
ताऊ जी (शादियों के मौसम में)
शादी में ताऊजी की जब होती है अगुवाई
आते ही, उन्होंने पिताजी की जिम्मेदारी घटाई।
समस्त कार्यो का करते हैं बेहद सूक्ष्म निरीक्षण
बहुत जाँच,परख के बाद ही, होता सफल परीक्षण।
प्रत्येक रीति,रिवाज में रखते हैं वो अपनी दखल
बिना अनुमति,असंभव होती कोई भी नई पहल।
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निश्चित समय पर, प्रत्येक कार्य का लेते हैं जिम्मा
बाराती सोचे,मस्ती के वास्ते हो जाए कोई करिश्मा।
बारात में नाचने की मस्ती को हर संभव रोके
आगे बढ़ो,बार-बार बारातियों को यहीं टोके।
द्वार पर नाचना, अभी मत थको
बैंड से कहते, तुम जरा आगे बढ़ो।
द्वार पर भी कभी ना नाचने देते ताऊजी
भोजन करो, क्या नाचते ही रहोगे बेटाजी।
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इस तरह निश्चित समय पर होते सब काम
ताऊ जी होते संतुष्ट और बाराती बेहद उदास।
गर ताऊजी न हो घरों की शादियों में
बारात नाचती रह जाए, गालियों में।
अपर्णा शर्मा
Dec.12th,25

एक ख़्याल
रिश्तों की चादर पर मोहब्बत के बेल बूटों को काढ़ लिया करों ।
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ख़ुशहाल मुस्तकबिल के लिए यादों का बक्सा भर लिया करों ।
अपर्णा शर्मा
16th May 23
