आँसुओं को सिर्फ़ अपनों के लिए पी लीजिए
मुस्कान को खुलकर ज़माने में बिखेर दीजिए।
गर मिले कोई सच्चा हम-मीत ज़िंदगी के सफ़र में
तो कांधे पर सर रखकर आँसू भी बहा दीजिए।
आँसुओं को सिर्फ़ अपनों के लिए पी लीजिए
मुस्कान को खुलकर ज़माने में बिखेर दीजिए।
गर मिले कोई सच्चा हम-मीत ज़िंदगी के सफ़र में
तो कांधे पर सर रखकर आँसू भी बहा दीजिए।