भावशून्य

सर्दी की इन सर्द शामों में
ठिठुरन छाई है, भावों में
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भावशून्य सा,बैठा दिनभर
बर्फ जमी, भाव,विचारों में।
अपर्णा शर्मा
Jan.7th,25

अलविदा

अब कभी, इस साल से कोई वार्तालाप न होगा
आज अलविदा बोल,साल 2024
पूर्वकाल होगा।
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शेष बची, सभी ख्वाहिशों और तम्मनाओं का
पूरा जिम्मेदार अब,आने वाला नया साल होगा।
अपर्णा शर्मा
Dec.31st,24

मानव

पंचतत्व से बना शरीर, ऐसा ही ,सुनता आया 
भूमि,अग्नि,गगन,वायु और जल से बनता आया।
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कोमल प्रकृति से निर्मित हो,क्षण भंगुर सी,होती जब काया
सौम्य सी काया में, फिर प्रस्तर ह्रदय क्यूं कर आया?
अपर्णा शर्मा
Dec.24th,24

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