सफर है यह जिंदगी,जहाँ है हज़ारों उलझने
जब भी मौका मिले सफर में ठहराव भी वाजिब है।
अगर कोई हद से ज्यादा दिखाए अपनापन
तो सफर में कुछ हादसा होना लाज़िम है।
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जरूरी नहीं इस सफर में सामान पर डाका पड़े
एहसासों का खजाना लुटना भी शामिल है।
नरम दिल ऐसे ही हर पड़ाव में न लुटते रहे
ठहर कर सोचो,क्या दुनिया एहसासों के काबिल है ?
अपर्णा शर्मा
June 12th,2026
अवसाद के दिनों में
निकल पड़ो तुम अपनी धुन में
मंजिल खुद ही दिख जाएगी
छोड़ो डरना मन ही मन में
कि ये राह किधर को जाएगी।
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याद करो वो बचपन के दिन
हर कदम बढ़ते बढ़ते था डुगलाया
फिर भी चलते-चलते कब सोचा
कि ये राह किधर को जाएगी।
जब जब दौर चला मुश्किल का
तब तब नया रस्ता था आजमाया
ऐ दिल क्यूँ है तू डूबा डूबा सा
कि ये राह किधर को जाएगी।
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वक़्त कभी न ठहरा है
ये वक़्त भी गुजर जाएगा
क्यूँ सोच सोच कर हैरां है
कि ये राह किधर को जाएगी।
अपर्णा शर्मा
June 5th, 2026
वक़्त की चाल
जिंदगी के मकड़जाल में यूँ फ़ंसा
हरबार वक़्त की चाल में मैं कसता रहा।
एकांत में देर तक बस यहीं सोचता रहा
क्यूँ कर मैं ही हर बार जाल में फंसता रहा।
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जिन समस्याओं का समाधान सामने था खड़ा
नाहक ही उन फैसलों से मुँह मोड़ता रहा।
जिंदगी के सभी झंझावात से लिपट कर
नाहक सुकून के पल यूँ ही गवांता रहा।
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सब छोड़ कर दूर निकलते निकलते
वक़्त को हर वक़्त यूँ ही टालता रहा।
छोड़ यार कह कर मुकरने के दिन गए अपर्णा
अब वक़्त पर वक़्त को जवाब देने का वक़्त आ रहा।
अपर्णा शर्मा
April17th,2026
