परिधान और रिश्ते

कच्चे सूत से बने वस्त्रों को पहन कर खद्दर से मजबूत होते थे रिश्ते
खूब झटक,पटक के बाद भी उम्र भर निभाए जाते थे रिश्ते।
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जब से आया है नाजुक और कोमल रेशमी परिधानों का ज़माना
तब से विशेष रखरखाव के बाद भी, धीरे-धीरे दरक रहे हैं रिश्ते।
अपर्णा शर्मा
Feb.3rd,2026

बापू और चरखा

चरखा संग्रहालय में यूँही जाना हो गया
जब वहाँ बैठे तो सुकून सा आ गया।
भांति भांति के चरखे, वहाँ सजे थे
विगत युग की वो गाथा कह रहे थे।
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स्वदेशीकरण के बीज़ बो कर स्वावलंबन सिखाया
विदेशी चुंगल से फिर देश को बाहर निकाला।
गांधी जी ने देश को अचूक हथियार दे दिया
जिससे देश आत्मनिर्भरता की दिशा में चल दिया।
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आज इत्तफाक से 30 जनवरी का ही दिन है
आज ही बापू की पुण्यतिथि का दिन है।
बापू आपको नमन , बारंबार नमन
विश्व में दी हमारी पहचान को नमन।
अपर्णा शर्मा
(Jan. 30th,2026), Jan.31st,26

वादा

यूँ तो हाथ दोनों तरफ से ही बढ़े थे
निभाने के वादे भी दोनों ने गढ़े थे।
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अचानक हाथ छूटे और वो दूर हो गए
फिर भी एक दूजे के इंतजार में खड़े थे।
अपर्णा शर्मा
jan. 27th,2026

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