जब-जब मोह हुआ माया से,
तिलिस्म का संसार खड़ा हुआ।
जब-जब भान हुआ सच का,
तिलिस्म तो ताश का महल हुआ।
जब-जब मोह हुआ माया से,
तिलिस्म का संसार खड़ा हुआ।
जब-जब भान हुआ सच का,
तिलिस्म तो ताश का महल हुआ।
सवेरे ही उससे मेरी मुलाकात हो गई.
देखते ही उस को मुस्कान खिल गई.
वोभी झूमकर हवा में खिलके मुस्कराया.
खूबसूरती से अपना हाल कह सुनाया.
मैं भी स्पर्श कर,उसे हौले से मुस्कराई.
दोनों के जीवन में अनेकों समानता पाई.
दुनिया की नज़र में हम दोनों काँटों से घिरे हैं.
नहीं जानते वो,यहीं हमारे सुरक्षा के दायरे हैं.
अपनों के काँटे कहाँ,कभी अपने ही चुभे है.
यहीं तो हमारे खिलने में सहायक बने है.
जन्म और कर्म भूमि दोनों की ही अलग है.
जीवन में दोनों के गुणों से महक ही महक है.
तेरे और मेरे खिलने, महकने के ज़ुदाअंदाज़ है.
दोनों ही अपनी बगिया के महकते गुलाब है.
चाँद तेरा प्रतिरात को नए रूप-रंग में आना.
मंद-मंद चाँदनी से जीवन का पाठ बताना.
सुख में इतना खुश न हो जाना.
तारों काअस्तित्व समझ न पाना.
अमा की रात भी तारों सजी ये कहना.
मंद-मंद चाँदनी से जीवन का पाठ बताना.
दुख में टूटकर कभी बिखर न जाना.
दूज का चांद सा तेरा अस्तित्व में आना.
धीरे-धीरे फिर से पूनम का चांद हो जाना.
मंद-मंद चाँदनी से जीवन का पाठ बताना.
सुख के बाद दुःख और फिर से सुख की रैना.
चार दिन चंदा की चाँदनी फिर से अंधेरी रैना.
समय के चक्र को सरलता से कह जाना.
मंद-मंद चाँदनी से जीवन का पाठ बताना.
ए चाँद! साकामी बनाता है तेरा यूँ बढ़ना.
अहंकार से बचाता है तेरा ही तो घटना.
जीवन के नाप-तौल को बखूबी सीखाना.
मंद-मंद चाँदनी से जीवन का पाठ बताना.