ना जाने कौन, रात भर आँसू बहाता रहा।
चांदनी रात में, किसे याद कर, जागता रहा।
छिप गया, सूरज की पहली किरण के साथ ही।
भिगो गया, सम्पूर्ण धरा को सुना के कथा प्रीत की।
ना जाने कौन, रात भर आँसू बहाता रहा।
चांदनी रात में, किसे याद कर, जागता रहा।
छिप गया, सूरज की पहली किरण के साथ ही।
भिगो गया, सम्पूर्ण धरा को सुना के कथा प्रीत की।
देखो! आया क्रिसमस का त्योहार
सर्दी में करता, खूब ऊर्जा का संचार।
सैंटा आता, अपने रथ पर, होके सवार
बच्चों को देता,सुन्दर,प्यारे-प्यारे उपहार।
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पर्व पर सबकी मुरादें पूरी करने
सोई भावना को दिल में जगाने।
सबमें जीने की चाह जगाता है
सबको ही आशावान बनाता है।
आगत साल की नई सी खुशराह दिखाता है
क्रिसमस बेरंग जीवन को सुर्ख रंग जाता है।
विचारों का आना जाना जीवन का प्रवाह बतलाता है
कभी स्नेह भाव से, कभी घृणा से परिचय कराता है।
माना विचारों की सात्विकता संजोए रखना सबकी बात नहीं
पर सद्विचार से पूर्ण गुणीजन का सानिध्य पाना कठिन भी नहीं।
विचारों की सकारात्मकता व्यक्तित्व निखारती है
जिधर से निकलो मीठी सुगंध बिखेर जाती है।
जब ऐसे ही मनसागर में भावों की लहरें उठती है
शब्दों का आकार ले,तब अपनी विचारों की दुनिया बसती है।