जिंदगी के दिए में उम्र बाती सी जल रही
शुक्र है कि उम्मीद की लौ में वो तर रही.
https://ae-pal.com/
कभी मंद कभी तीव्र सी रोशनी बिखेर रही
खुशी और ग़म दोनों में हौंसला सीखा रही.
जिंदगी के दिए में उम्र बाती सी जल रही
शुक्र है कि उम्मीद की लौ में वो तर रही.
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कभी मंद कभी तीव्र सी रोशनी बिखेर रही
खुशी और ग़म दोनों में हौंसला सीखा रही.
मासूम रही जब तक ज़िंदगी
बिंदास जीते रहे
समझदारियों ने फिर धीरे–धीरे
समझौते सिखा दिए।
जब मन के चपल समंदर में
ख्वाहिशों के ढेरों ज्वार उठे
तब समझौते के शांत भाटा ने
जिम्मेदारी के किनारे दिखा दिए।
समझौता शब्द जब पढ़ा मैंने
सम का अर्थ बराबर समझा
और समझौते के क्रियान्वयन
सदा एकतरफा ही दिखाई दिए।
हमें खुद को नहीं पता कि हम क्या हैं?
और उसने हमारा पूरा किरदार गढ़ दिया।
अचरज कैसा ? आप भी बाहर आइए
देखिए! आप पर कितना कुछ लिख दिया।