ना जाने कौन, रात भर आँसू बहाता रहा।
चांदनी रात में, किसे याद कर, जागता रहा।
छिप गया, सूरज की पहली किरण के साथ ही।
भिगो गया, सम्पूर्ण धरा को सुना के कथा प्रीत की।
ना जाने कौन, रात भर आँसू बहाता रहा।
चांदनी रात में, किसे याद कर, जागता रहा।
छिप गया, सूरज की पहली किरण के साथ ही।
भिगो गया, सम्पूर्ण धरा को सुना के कथा प्रीत की।
गोद में चूम कर,वालदेन ने बच्चे को,दुनिया में आगाज कराया.
फिर प्यार, मोहब्बत और रोक टोक से दुनिया का अंदाज़ बताया.
कभी मुगालते में न रहना, कि ज़िंदगी फूलों से खिली खुशनुमा सहर है.
हमारे दिल -ए -अजीज ये ज़िंदगी एक इम्तिहानों का सफर हैं.
चार सलाई बुनकर दो सलाई उधड़ती जा रही है ज़िंदगी।
ऐ ज़िंदगी! लिहाज़ कर, संवर जा, छोड़ दे ये दिल्लगी।