बहुत शुक्रिया, ए जिंदगी! तूने खूब घावों से नवाजा
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जब जब हरे हुए घाव, तब तब पुरवा को पहचाना।
अपर्णा शर्मा
July 11th, 23
बहुत शुक्रिया, ए जिंदगी! तूने खूब घावों से नवाजा
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जब जब हरे हुए घाव, तब तब पुरवा को पहचाना।
अपर्णा शर्मा
July 11th, 23
रास्ते और इंतजार अंतहीन ही रहे
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सवाल खुद ब खुद जवाब बन रहे ।
अपर्णा शर्मा
July 4th, 23
नजरअंदाज करना बात को, ये कोई अंदाज नहीं
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बस नाराज न हो जिंदगी, ये लिहाज ही सही।
अपर्णा शर्मा
June 27th, 23