दृष्टिकोण

जिंदगी के सीधे से रास्तो पर ,
अकस्मात आ ही जाते हैं, जब तब तीव्र मोड़
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कोणों से काटते, जटिल रास्ते भी,
कभी बदल न पाए, आशा भरा दृष्टिकोण।
अपर्णा शर्मा
Sept.12th,23

तलाश

बेदर्द को हमदर्द समझने की भूल कुछ यूँ हो गई
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कि फिर हमसफर की तलाश यूँ मुकम्मल हो गई।
अपर्णा शर्मा
August 29th,23

जिंदगी

खुदा ने जाम सी बख्शी है जिंदगी
कुछ छलक गई,कुछ गटक गई।
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बेफिक्र सी लगी, जब जब जिंदगी
कभी फिसल गई,कभी अटक गई।
अपर्णा शर्मा
August 22nd,23

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