सूरज के चढ़ते ही वो मेरे संग संग हो लेती है
https://ae-pal.com/
जहाँ-जहाँ मैं चलूँ वो मेरे आगे पीछे ही रहती है।
अपर्णा शर्मा
April 9th,24
मायूस घर
किसने कहा, कि त्योहार केवल इंसान ही मनाते हैं
उनके संग संग घर के दर –ओ–दीवार भी मुस्कुराते हैं
https://ae-pal.com/
त्योहार गुजरते ही,जब इंसान निकल जाते है अपनी कर्मभूमि को
मायूस घर,दूसरे त्योहार के इंतजार में, वहीं खड़े रह जाते हैं ।
अपर्णा शर्मा
March26th,24
फिर बसंत आया
धरती ने कुहासे का आवरण हटाकर देखा,अपने सम्मुख माघ को पाया
https://ae-pal.com/
धरा मुस्काई और प्रकृति ने कहा आह ! फिर बसंत आया।
अपर्णा शर्मा
Feb.6th,24
