बागवां

कलियों को मात्र उपस्थिति से खिला दे
स्नेह भाव से पुष्पों को संरक्षित कर दे।
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जो हर भाव को साकार करने का रखे हौंसला
तो क्यूं न, क्यारी पुनः पुनः हृदय उसी पर वार दे।
अपर्णा शर्मा
Nov.12th,24

दस्तक

दिलों से जुड़े,मगर तकदीर से दूर हुए,दोस्तों संग मुलाकात
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जैसे समझदारी संग,फिर से दिलों पर,बचपन की दस्तक।
अपर्णा शर्मा
Oct 16th,24

आकांक्षाएं

आकांक्षाएं सदा से, संसार में ,अनन्तिम ही मिली 
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एक पूर्ण होते ही, दूजी,अविलंब मुस्कुराती मिली।
अपर्णा शर्मा
Oct.8th,24

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