वो सफर पर अकेला था
वो वहीं पर अकेली खड़ी
बस यह वज़ह रही जीने की
वो थी प्रेम की सुनहरी लड़ी.
वक़्त के बीतते-बीतते
दोनों बढ़ चले अपने रास्ते
पर आज भी वज़ह है वहीं
दोनों के प्रेम की सुनहरी लड़ी.
न मिलने की अभिलाषा
न विरह का कराहना
मौन जीवन में वज़ह वहीं
दोनों के प्रेम की सुनहरी लड़ी.
अपर्णा शर्मा
June 26th,2026
