सूरज के उगने से पहले
चिड़ियों के कलरव से पहले
उठ जाती,माँ के हाथों की चूड़ियां
खूब खनकती चूड़ियां।
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घर के हर कोने-कोने में
हर काम के पूरे होने में
माँ की हर आहट पर
खूब खनकती चूड़ियां।
छन छन कर गीत सुनाती
भोजन में स्नेह रस मिलाती
मधुर आवाज की तान सी
खूब खनकती चूड़ियां।
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भगिनी के हाथों में अल्हड़पन सी
भाभी के हाथों में मर्यादित सी
माँ की ममता से भरी भरी
खूब खनकती चूड़ियां।
श्रृंगार चूड़ी बिन रहे,सदा अधूरा
जैसे बिन बासंती, बसंत हो बौरा
रंग बिरंगी काँच की नाजुक
प्रेम चिन्ह है ये चूड़ियां।
अपर्णा शर्मा
April 4th,2026
