साथ

मंज़िल की तलाश में
चलते रहे दूर राह में
सोचों से रहे बहुत दूर
चलते रहे बस साथ में।
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हाथ अपने ही हाथ में
डूबे अपने ही विचार में
वो बनकर हमसफर
अनजान से पूरे सफर में।
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दिखे नहीं किसी विवाद में
पड़े नहीं कभी तकरार में
बस साथ है कि साथ है
न इकरार में न इजहार में।
अपर्णा शर्मा
April25th,2025

वक़्त ठिठका सा रहता है।

पुरुष के जीवन में जब दुर्घटना घट जाती है
तब उसकी जीवन नैया डगमगा सी जाती है।
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ठहरे वक़्त में भी कभी आस ना छूट पाती है
सभी के सहयोग से नई डगर दिख जाती है।

पर स्त्री होना आसान नहीं,वक़्त कहाँ चलता है
जीवन के हर दौर में वक़्त ठिठका सा ही रहता है।
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चुप सा वक़्त हर पल जीवन का लक्ष्य बदलता है
वो बदलती खुद को पर वक़्त ठहरा सा होता है।
अपर्णा शर्मा
April18th,25

उगती फिर दूब दुबारा

जीवन की शांत सरिता में
मन की नौका करे विहार
जटिल सी उठती लहरों में
थामी अभिलाषाओं की पतवार।

सुख की लहरे उठे तुंग तक
पर क्षणिका हुई मात्र
दुख की लहरे ठहरी पैठ तक
करे हर साँस क्लांत।
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आशा से भरी मन की नैया
जीवन की सरिता में घूमे
निराशा के बोझ से मन नैया
बीच भँवर में खूब जूझे।

आशाओं के फल न मिलने से
नौका में पड़े कई दरार
और मन की दरार से पहले
जीवन में सूखे जल की धार।
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बंजर मन ऐसा बावरा जो
ढूंढे हर पल किनारा
हल्की सी आशा की फुहार में
उगती फिर दूब दुबारा ।
अपर्णा शर्मा
April 11th,25

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