उठो, चलो, थोड़ा खुद के लिए भी जी जाओ
बाहर निकलो, थोड़ा रुबरु दुनिया से हो जाओ।
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जिम्मेदारी निभाते,निभाते, जीवन की साँझ आई
आओ,अब इस साँझ का उत्सव तुम मनाओ ।
अपर्णा शर्मा
Dec.9th,25
बचपन
कभी सोचता हूँ कि सबसे खूबसूरत पड़ाव है बचपन
हर सन्तान के लिए सबसे खूबसूरत आशिर्वाद है बचपन
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उम्र के किसी भी चरण में जब थक जाती है जिंदगी
खुल कर फिर हँसाता है,वहीं दिल में छुपा हुआ बचपन।
अपर्णा शर्मा
Nov.25th, 25
आस
काश में जो छिपी रहती है थोड़ी सी आस
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वहीं बार बार जगाती है जीवन में विश्वास।
अपर्णा शर्मा
Nov.18th,25
