दिल में छुपी उदासी,चेहरे पर उभर कर आ गई
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गम की गहराई आंखों की बेरुखी से बया हो गई।
अपर्णा शर्मा
Dec.12th,23
शोर
खामोश थी जिंदगी और मैं सुकूं समझता रहा
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और भीतर ही भीतर बेहिसाब शोर जुड़ता रहा ।
अपर्णा शर्मा
Dec.5th, 23
लेखनी
समाज को शंकित करने पर
समाज के भयभीत होने पर ।
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व्यक्ति जब-जब मौन हो जाए
तब निगाह ठहरती है लेखनी पर।
अपर्णा शर्मा
Nov.28th, 23
