प्रवासी

तिनका तिनका
बाट जोहता
हिस्सा था वो
जिस नीड़ का।
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तिनका तिनका
रोज बिखरता
किस्सा है वो
अब भीड़ का।
(*नीड़-घोंसला)
अपर्णा शर्मा
March5th,24

जाने कब …

सपने,
सरल मन
और
शुद्ध ऊनी स्वेटर
मौसम दर मौसम
धुंधला गए ।
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सपनें,
सरल मन
और
शुद्ध ऊनी स्वेटर
सफाई दर सफाई
सिकुड़ते गए।
अपर्णा शर्मा
Feb.27th,24

इत्मीनान

इत्मीनान का आगाज हो जाए, जब जिंदगी में
और मोहब्बत फूल सी खिल जाए हरेक दिल में।

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तभी दुखों के बादल छंटकर,आसमाँ चमक उठे
समझो,बसंत आकर छा गया सभी के तन-मन में।
अपर्णा शर्मा
Feb.20th,24

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