दो पंक्ति

आजकल विचार किसी कोने में छुप से गए हैं
कलम भी सच लिखने में झिझकती बहुत है।
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सच यह है, कि सच को पढ़ना,कोई आसान नहीं
लेकिन झूठ को सच सा लिखने में मुश्किल बहुत है।
अपर्णा शर्मा
March17th, 2026

दो पंक्ति

जिद, वहीं अड़ी रही और उसी जगह पर खड़ी रही।
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आदतें लड़ी नहीं, बदलती रही और आगे बढ़ती रही।
अपर्णा शर्मा
March10th,26

दो पंक्ति

अंगारों पर बैठी दुनिया,एक दूजे को कमतर आंक रही।
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क्रूर होती दुनिया,अब मानवता को धिक्कार रही।
अपर्णा शर्मा
March 3rd,2026

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