जिंदगी में सादगी भी नाटक सी जी रही
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वक़्त देख कर ओढ़ी और उतारी जा रही.
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वक़्त देख कर ओढ़ी और उतारी जा रही.
वो नफरत से लबालब बगावत को निकले हैं
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हम भी इश्क में डूब कर इबादत को निकले हैं ।
खुशी का कोई मोल नहीं, सदा रही अनमोल
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ढूँढे से मिले नहीं, कभी मिल जाती बेमोल।