ख़्वाहिश है कभी अंगड़ाई,कभी परछाई,कभी
मुस्कराती।
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कभी पूरी,कभी अधूरी,कभी जिम्मेदारियों में कुनमुनाती।
अपर्णा शर्मा
6th June 23
तानाबाना
जीवन है धागे सा जो तकली सा खूब नाच नचाए
साँस के तानेबाने से जीवन हर पल बुनता जाए।
अपर्णा शर्मा
30th May 23
चाँद जब
चाँद जब आसमाँ पर रोशनी बिखेरता है
ना जाने कितने रिश्तों में रंग बिखेर देता है।
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किसी का पुत्र,और प्रियतम बन इतराता है
कभी खुशी गम के किस्से सुन सिमट जाता है ।
अपर्णा शर्मा 23 May 23
