गुफ़्तगू

बिन मुलाकात होती रही मुसलसल गुफ़्तगू
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गज़ब खामोशी पसरी जब हुए वो रुबरु।

अपर्णा शर्मा

August8th, 23

जीस्त

मजबूरियाँ किनारे पर ठहर गई
एहसास ए सुकून जब मिला।
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जश्न ए बहार सी जीस्त मिल गई
वफा ए समंदर आ मिला।
(जीस्त- जिंदगी)
अपर्णा शर्मा
August 1st, 23

उड़ान

हर जीव अपनी मुट्ठी में लाता अपनी धरती अपना आसमान।
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हौसलों की ऊर्जा हो बेशक,क्यूँ ना मिलती सपनों की उड़ान ?
अपर्णा शर्मा
July 25th, 23

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