पुनः

जीवन वृक्ष की डालिया कभी टूटी, कभी मुरझाई
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आशा के झोंके से ,पुनः, पुनः खिलकर मुस्कराई ।
अपर्णा शर्मा
Sept.19th, 23

दृष्टिकोण

जिंदगी के सीधे से रास्तो पर ,
अकस्मात आ ही जाते हैं, जब तब तीव्र मोड़
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कोणों से काटते, जटिल रास्ते भी,
कभी बदल न पाए, आशा भरा दृष्टिकोण।
अपर्णा शर्मा
Sept.12th,23

मंजिल

सफ़र ए जिंदगी रही ,कहकहे लगाने में
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मंजिल ए मौत थी ,ख़ामोश सी इंतजार में
अपर्णा शर्मा
Sept.5th, 23

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