जीवन के सफर में आते कई पड़ाव
कभी आशा भरी होती सुर्ख उजास।
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ऊँचाईयां छूता मध्याह्न जीवन का
फिर शीतलता दे जाती जीवन में साँझ।
अपर्णा शर्मा
Oct.10th,23
जीवन के सफर में आते कई पड़ाव
कभी आशा भरी होती सुर्ख उजास।
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ऊँचाईयां छूता मध्याह्न जीवन का
फिर शीतलता दे जाती जीवन में साँझ।
अपर्णा शर्मा
Oct.10th,23
अपनी खुशी के लिए किसी को बाध्य करना
जैसे उस को अपने पिंजरे में कैद करना.
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हर हाल में सभी की खुशियो का ख्याल करना
ऐसा ही है,जैसे खुद के लिए पिंजरा तैयार करना.
अपर्णा शर्मा
Oct.3rd,23
छला गया बार बार, यकीनन हर बार
कोई रिश्ता रहा हो या रहा कोई जानकार।
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गाहे-बगाहे,जब भी जरूरत आन पड़ी
सिरफिरा सा खड़ा, हथेली पे जान ले हर हाल।
अपर्णा शर्मा
Sept.26th,23