सफ़र

जिंदगी का सफर,रेल के सफर सा अस्थिर होता है
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दोनों का सफर से ठीक पहले प्लेटफॉर्म बदल जाता है।
अपर्णा शर्मा
March19th,24

घरौंदे

चारों ओर दिखते हैं, मतलब से लबालब स्वार्थ के रिश्ते।
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बुजुर्ग आँखें जानती है, रेत सी जिंदगी में रेत के घरौंदे।
अपर्णा शर्मा
March12th,24

प्रवासी

तिनका तिनका
बाट जोहता
हिस्सा था वो
जिस नीड़ का।
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तिनका तिनका
रोज बिखरता
किस्सा है वो
अब भीड़ का।
(*नीड़-घोंसला)
अपर्णा शर्मा
March5th,24

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