एक आईना ऐसा भी रख अपने पास में
जिसमें जैसा है अपना वज़ूद ,वैसा दिखना चाहिए
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कोने तो रोज ही दरकते रहते हैं आईने के
बस रिश्ता,आईने में, पहला से दिखना चाहिए.
अपर्णा शर्मा
April23rd,24
एकाकीपन
अपना सब कुछ सहर्ष लुटा कर,संतानो को हर हाल में जिता कर
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अपने समूचे वज़ूद को खोकर,निनिर्मेष से हैं,अपने घर में पराए होकर.
अपर्णा शर्मा April16th, 24
परछाई
सूरज के चढ़ते ही वो मेरे संग संग हो लेती है
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जहाँ-जहाँ मैं चलूँ वो मेरे आगे पीछे ही रहती है।
अपर्णा शर्मा
April 9th,24
