पहली पीढ़ी से ले कर अमूल्य संस्कार
दूजी ने तीजी पीढ़ी को दिए अशुद्ध आचरण
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जो सच्चे संवाहक न बने संस्कारों के
वृद्धावस्था में दिखेगा अंधकार ही अंधकार.
अपर्णा शर्मा
May14th,24
अस्तित्व
अंत में, अस्तित्व खो कर समन्दर हो गई
मीठी नदी,समंदर में मिल कर खारी हो गई
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चटकी तो होगी चाहत और डिगा होगा विश्वास भी
आखिर क्या थी मैं? जो प्रेम में अपना सत्व खो गई।
अपर्णा शर्मा
May 7th,24
ईश्वर
बहुधा उन्हें हर बात पर मौन देखा है
भाव शून्य होते हुए अक्सर देखा है।
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धीरे धीरे एक स्थिरता की स्थिति में
माता पिता को ईश्वर होते हुए देखा है।
अपर्णा शर्मा
April 30th,24
