दीवार

जन्म जन्मांतर तक सब सुनती रही
सभी के राज,वो अपने तक समेटे रही
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हाँ,वो दीवार ही थी हर रिश्ते की
जो चुप रहकर रिश्ते निभाती रही.
अपर्णा शर्मा
June 4th,24

‘मैं’

जब जब ‘मैं’जीता है,तब तब ‘हम’ हार गया
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रंग बदलती दुनिया में,रिश्ता यूँ बेहाल हुआ।
अपर्णा शर्मा
May28th,24

भ्रम

जिंदगी भर सपने में जिया और कभी भ्रम में
मानो विचरता रहा, कहीं कल्पित संसार में।
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यकायक दोनों टूट गए सच के धरातल पर
अब नहीं रहता, वो किसी तन्द्रा या किसी धोखे में।
अपर्णा शर्मा
May21st,24

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