छल

अपना बना कर वो,साथ चलता गया
धीरे-धीरे सभी से,बहुत दूर करता गया।
https://ae-pal.com/
समझ न सका,वो दोस्त रहा या रहा दुश्मन
जो अपनों से दूर ,तन्हा कर,सबकुछ हो गया।
अपर्णा शर्मा
August 27th, 24

जाल

सुबह-शाम बेहतर जिंदगी बनाने को निकले
बेहतरीन के फ़ेर में,जिंदगी तमाम कर निकले।
https://ae-pal.com/
बेख़बर से,फंसते गए माया के इस महा जाल में
और हर तरफ अवसाद में डूबे लोग दिखे।
अपर्णा शर्मा
August 20th,24

तरीका

किसी ने कब चाह,कि हंगामा खड़ा हो
मकसद शायद अपनी बात कहने का हो
https://ae-pal.com/
गर बात करने और रखने का तरीका न आए
तो मुमकिन है कि हर बात पर हंगामा खड़ा हो।
अपर्णा शर्मा
Aug.13th,24

Blog at WordPress.com.

Up ↑