शौक

मेहनत के बल पर ही, कामयाबी हाथ आती है
कामयाबी की सीढ़ी पर, व्यस्तता भी खूब होती है।
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शुक्र है बचपन में, कुछ शौक रख छोड़े थे हमने
वो धुन ही तो नाकामयाबी पर मरहम लगाती है।
अपर्णा शर्मा
Sept.18th,24

ख़्याल

शांत पड़े गहरे पोखर में ,आज हलचल मचती रही
यादों की कंकरी, पुरजोर, आज शोर करती रही।
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जिन यादों को,झील सा शांत समझ लिया था अपर्णा
उन यादों के, बवंडर में,ख़्यालों की सुनामी उठती रही।
अपर्णा शर्मा
Sept.10th,24

पहचान

मोहब्बत-ए-पैगाम,हर्फ दर हर्फ दिलों में घुलता गया।
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हर्फ ही हैं,जो इंसान की इंसान से पहचान करा गया।
अपर्णा शर्मा
September 3rd, 24

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