अब कभी, इस साल से कोई वार्तालाप न होगा
आज अलविदा बोल,साल 2024
पूर्वकाल होगा।
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शेष बची, सभी ख्वाहिशों और तम्मनाओं का
पूरा जिम्मेदार अब,आने वाला नया साल होगा।
अपर्णा शर्मा
Dec.31st,24
मानव
पंचतत्व से बना शरीर, ऐसा ही ,सुनता आया
भूमि,अग्नि,गगन,वायु और जल से बनता आया।
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कोमल प्रकृति से निर्मित हो,क्षण भंगुर सी,होती जब काया
सौम्य सी काया में, फिर प्रस्तर ह्रदय क्यूं कर आया?
अपर्णा शर्मा
Dec.24th,24
छोड़ चला
जाड़े की आधी रात में, वादों, सपनों में लिपटा
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यादें दे,गम छोड़ चला, एक साल फिर से बीता।
अपर्णा शर्मा
Dec.17th,24
