फ़ूलों के महकने से,भौरों के गुंजन से
जाग गई दिलों में,अधूरी कहानी यक से।
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बौराए अमराई की महक से, सरसों के फूल से
प्रेम के अनुरागी, डूबे हैं फिर उसी अनुराग में।
अपर्णा शर्मा
Feb.11th,25
मन का बटुआ
सरलता इतनी रख,कि सब अपने हो जाए
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स्पष्टता इतनी रख, कि पराए दूर हो जाए।
अपर्णा शर्मा
Feb.4th,25
परिवर्तन
परिवर्तन ही सत्य है,
सुनकर मन को भाता है।
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मौसम का परिवर्तन भी
नित,नई आस जगाता है।
अपर्णा शर्मा
Jan.28th,25
