जटिल समस्या के समाधान, कभी सरल नहीं
सुलगते सवालों के बुझे से जवाब दिखे हर कहीं ।
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जिंदगी ऐसे ही, विलोम शब्दों की पहेली रही
मौत को धोखे में रख कर, जिंदगी जीती रही।
अपर्णा शर्मा
April8th,25
साथ
किसी को अफ़सोस रहा कि कभी किसी का साथ न मिला।
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कोई सदमें में है कि अंगुली पकड़ने वाला गुमराह कर चला।
अपर्णा शर्मा
April 1st,25
उदास घर
इस बरस भी शहर में कुछ मकान बेरंग रह गए
द्वार, आँगन और दीवारें फिर से खुश्क रह गए।
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अपनों के इंतजार में ही बरस पल- पल गुजर रहे
उदास घरों में इस बार भी उदास रंग बिखर गए।
अपर्णा शर्मा
March18th,25
