यूँ तो, चारों ओर, प्रेम जैसे शब्दों का खूब बोलबाला है।
https://ae-pal.com/
असल में, प्रेम अब तोल-मोल या लाभ-हानि का मामला है ।
अपर्णा शर्मा
March 4th,25
पतझड़
फलक,गर दरख्त से गिरे, तो सदा पतझड़ नहीं होता
https://ae-pal.com/
गर गिर जाए, अख़लाक़ घरों में,फिर बसंत नहीं होता।
अपर्णा शर्मा
Feb.25th,25
शख्सियत
आसान नहीं, पहाड़ सी शख्सियत रखना
https://ae-pal.com/
कभी बर्फ सा जमना,कभी आग सा तपना।
अपर्णा शर्मा
Feb. 18th,25
