साथ

किसी को अफ़सोस रहा कि कभी किसी का साथ न मिला।
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कोई सदमें में है कि अंगुली पकड़ने वाला गुमराह कर चला।
अपर्णा शर्मा
April 1st,25

उदास घर

इस बरस भी शहर में कुछ मकान बेरंग रह गए
द्वार, आँगन और दीवारें फिर से खुश्क रह गए।
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अपनों के इंतजार में ही बरस पल- पल गुजर रहे
उदास घरों में इस बार भी उदास रंग बिखर गए।
अपर्णा शर्मा
March18th,25

त्योहार

त्योहार इसलिए भी जरूरी,कि जिंदगी में उल्लास आ जाए।
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झंझावातों में उलझे, मनुष्य को, कुछ आराम आ जाए।
अपर्णा शर्मा
March, 11th,25

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