अब उनसे बात नहीं होती जो हर हाल हौसला बढ़ाते रहे।
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दुःखों की घोर बारिशों में जो सुखों का आसमाँ दिखाते रहे।
अपर्णा शर्मा
May13th,25
अमलतास
अग्नि से जलते फूल नहीं,झाड़फानुस लगते हो।
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शीतल समीर संग तुम, चेहरों पर मुस्कान देते हो।
अपर्णा शर्मा
May 6th,25
खामोशी
अलग ही अंदाज में,जीती है खामोशी
चाहे पहली मुलाकात की,हो सरगोशी।
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या आखिरी मुलाकात की,अनगिनत चुप
फैली होती है कुछ बोलती हुई खामोशी।
अपर्णा शर्मा
April29th,25
