ब्याह की मेहंदी

इन सुर्ख हाथों में छिपे होते,अनंत एहसास
पिता की उदासी और पिया का अनुराग।
https://ae-pal.com/
दो घरों में बंटती हुई,बेटियों की शख्सियत
और घिरे होते अनिश्चितताओं के ढेरों बादल।
अपर्णा शर्मा
June3rd,25

फलसफा

जब वालदैन द्वारा,अपने ही बच्चों को अपना वालदैन बनाना
जैसे, जहां से शुरु किया सफर,  फिर वहीं आकर ठहर जाना।
https://ae-pal.com/
जी कर पूरी जिंदगी का चक्कर, और एक फलसफा कह जाना
फिर एक सुबह खुद अफ़साना बन, दुनिया को अलविदा कर जाना।
अपर्णा शर्मा
May, 27th,25

टूटना

जो लफ्फाजी करते बहुत हैं,वो अक्सर सोचते बहुत हैं।
https://ae-pal.com/
छुपाकर गम को अपने दिल में,हर वक़्त टूटते बहुत हैं।
अपर्णा शर्मा
May 20th,25

Blog at WordPress.com.

Up ↑