चल अकेला

सोचा है..
वो किस हद तक सहता होगा
आखिर में,
वो किस हद तक टूटा होगा।
https://ae-pal.com/
सोचा है..
वो किस हद तक बिखरा होगा
आखिर में,
वो किस हद तक सिमटा होगा।
https://ae-pal.com/
सोचा है..
वो जब सहते सहते टूटा होगा
बिखरा सा फिर सिमटा होगा।

आखिर में,
निराशा में ही आशा दिखती होगी
पगडंडी ही रस्ता होती होगी।
अपर्णा शर्मा
Oct.3rd,2026

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