सुवासित हो गया मन,प्रेम के हो जाने से
मुखरित हो गया मौन प्रेम के हो जाने से।
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प्रेम ही सीखाता सभी,उत्तम आचरण
बन गया वास्तविक मनुष्य,प्रेम के हो जाने से।
अपर्णा शर्मा
Sept.2nd,25
अनकही
मंज़िल की तलाश में
अनजानी सी राह में
अवरोधों से बेफिक्र
चलते रहे ,साथ में।
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हाथ को लेकर हाथ में
डूबे एक से विचार में
हम बनकर हमसफर
मंजिल की तलाश में.
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दिखे नहीं किसी विवाद में
पड़े नहीं कभी तकरार में
बस साथ का लिए यकीं
आ गए आखिरी पड़ाव में।
अपर्णा शर्मा
August 29th, 25
डर
यूँ तो,हर कदम पर, डर का बसेरा है
पर, डर-डर कर जीना भी क्या जीना है।
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सतर्क रहो,सदा ही,बजाय डरने के
इस तरह से ही अपने हर डर से जीतना है।
अपर्णा शर्मा
August 26th,25
