ठोकरें भी जरूरी सी रही जिंदगी में
जो ताउम्र सम्भल कर जीना सिखा गई।
https://ae-pal.com/
उड़ते रहे जो सारे जहाँ औ आसमाँ में
कि आंधियां पंखों को साध ना सिखा गई।
अपर्णा शर्मा
Oct.24th,23
फुर्सत में
अपने अपनों से मिलने
परदेस को है जब उड़ते
अपनों को यहाँ छोड़कर
क्या याद हमें भी करते?
https://ae-pal.com/
भागमभाग की जिंदगानी में
ऐसे फुर्सत के क्षण भी है आते
उनमें अपनों का अपनापन
क्या वे क्षण खूब रुलाते?
https://ae-pal.com/
यहाँ भी इंतजार की घड़ियां
मानो जैसे बंधन की कड़ियां
फुर्सत भी सूनापन गहराती है
देती यादों की जलबुझ लड़ियां।
अपर्णा शर्मा
Oct.20th,23
फुर्सत
कहीं व्यस्तताएं अनगिनत हैं,कि फुर्सत ढूंढे नहीं मिलती।
https://ae-pal.com/
कहीं फुरसतिया ना समझे कोई, सो व्यस्तताएं ओढ़ ली।
अपर्णा शर्मा
Oct.17th,23
