जिल्द किताबों की, बदलने से क्या फायदा
बदलता नहीं कभी, किसी हर्फ़ का मायना।
जिल्द किताबों की, बदलने से क्या फायदा
बदलता नहीं कभी, किसी हर्फ़ का मायना।
जो बीत गया सो बीत गया
कल से भी आशा क्या रखना.
आज ही में सब कुछ छुपा हुआ
आने वाले पल का बस ये कहना।
जाने वाले को कौन रोक सका
चाहे कितने भी जोर लगा लो.
हरदम एक से बन कर रहना
आने जाने का फर्क़ मिटालो।
जब तक जिसको रहना है
सर्वश्रेष्ठ अपना उसको देते रहना
चला जाए तो चला जाए
मन में मलाल कभी मत रखना।
जो भी हो मन में,कह देना
फिर चुप्पी ही रह जाएगी
कहदो क्या कहना,क्या सुनना
फिर चुप्पी ही कहर बन जाएगी।
धीरे-धीरे अवधि समाप्ति पर आई है
विदाई की बेला पास और पास आई है।
समेट लिया उसने बक्सा समय का
बना लिया बही खाता हर तारीख का।
भर लिया हँसी खुशी की यादों का खजाना
टंगा है थैला भी, जिस में बोझ है दुखों का।
जा रहा है,सबके कुछ ना कुछ काम करके पूरे
दे जाएगा, नवागत को, जो रह गए काम अधूरे।
देहरी के दूसरी ओर , कुछ पग की दूरी पर
वो खड़ा है, उत्साहित सा अपने आगमन पर।
आगत की खुशी और विगत के विदाई की विडंबना
विदाई ले 2022,थमा देगा 23 को सभी कार्य योजना.