चाँद जब आसमाँ पर रोशनी बिखेरता है
ना जाने कितने रिश्तों में रंग बिखेर देता है।
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किसी का पुत्र,और प्रियतम बन इतराता है
कभी खुशी गम के किस्से सुन सिमट जाता है ।
अपर्णा शर्मा 23 May 23
चाँद जब आसमाँ पर रोशनी बिखेरता है
ना जाने कितने रिश्तों में रंग बिखेर देता है।
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किसी का पुत्र,और प्रियतम बन इतराता है
कभी खुशी गम के किस्से सुन सिमट जाता है ।
अपर्णा शर्मा 23 May 23
इक मासूम चेहरा ईश्वर प्रदत
उसपर सजे मुखौटे अनगिनत।
कभी सत्य का, कभी असत्य का
कभी प्रेम का और कभी छल का।
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जब जिस मुखौटे से काम निकले.
वहीं मुखौटा ठाठ से मुख पे चमके।
यदि दुनिया परिचित हुई,इस कला की
विषादिता ही सिर्फ मित्र है ऐसे इंसान की।
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स्वयं सदा वास्तविक रूप में ही रहिए
मुखौटावानों को पहचानते ही सतर्क होइए।
अपर्णा शर्मा
19th May 23
रिश्तों की चादर पर मोहब्बत के बेल बूटों को काढ़ लिया करों ।
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ख़ुशहाल मुस्तकबिल के लिए यादों का बक्सा भर लिया करों ।
अपर्णा शर्मा
16th May 23