तरजीह

नजरअंदाज करके वो वालदैन को
बेवजह तरजीह दे रहे हैं औलाद को।
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समझ बैठे हैं,महफ़ूज़ अपना मुस्तकबिल
जानते नहीं वक़्त क्या देगा नसीब को।
अपर्णा शर्मा
June 24th,25

समय अनमोल

उत्तम समय प्रिय आशीष सा.
अधम समय अभिशाप जैसा।

समग्र प्रकृति समय के निहित.
कालचक्र सी निरंतर चलित।
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समय धन ही सबसे अनमोल.
क्रय न होता किसी भी मोल।

समय की गति का रखा जो मान.
समय बना उत्तम,बना भाग्यवान।
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समय को कभी न करना नष्ट.
रुष्ट समय करता जीवन नष्ट।

समय को बनाओ सदा उपयोगी.
पाओ जीवन में जो मन में सोची
अपर्णा शर्मा June 20th,25

सपने

कछुए की चाल सी जिंदगी में, झंझावात हज़ारों है।
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सपने भरे गुब्बारे हैं, जिनमें, रूकावटें लाखों है।
अपर्णा शर्मा
June17th,25

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