सब्र इतना ही देना ऐ खुदा, जो इज्ज़त पर आँच न आए।
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साबीर* को ये दुनिया अक्सर कमजोर समझ लेती है।
धैर्यवान*
अपर्णा शर्मा
Oct.6th,2026
चल अकेला
सोचा है..
वो किस हद तक सहता होगा
आखिर में,
वो किस हद तक टूटा होगा।
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सोचा है..
वो किस हद तक बिखरा होगा
आखिर में,
वो किस हद तक सिमटा होगा।
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सोचा है..
वो जब सहते सहते टूटा होगा
बिखरा सा फिर सिमटा होगा।
आखिर में,
निराशा में ही आशा दिखती होगी
पगडंडी ही रस्ता होती होगी।
अपर्णा शर्मा
Oct.3rd,2026
डर
बीते हुए खूबसूरत पलों को जीना चाहता है
साथ ही अप्रिय पलों को बदलना चाहता है।
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वर्तमान की बेहतरीन कल्पनाओं में विचरता मनुष्य
अपने भविष्य से फिर भी थोड़ा डर जाता है।
अपर्णा शर्मा
Sept.29th,2026
