शीतल रातों में चाँद सी चमक ले कर
छा गई हर जगह चाँदनी सी बिखर कर
यहाँ, वहाँ सब ओर वो सितारों सी दिख रही
चाँदनी के तार से यादों के गलीचे काढ़ कर।
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उसको सामने देख रजनीगंधा महक रही
सभी श्वेत पुष्पों पर उसकी मौजूदगी दिख रही
हरसिंगार का सिंगार प्रकृति को सजा रहा
उसके स्वागत को धरा आसमाँ को निहार रही।
आई वो और आलिंगन से तृप्त कर दिया
हर पत्ते,फूल पर अपना स्पर्श अंकित कर दिया
फैलाया प्रकृति ने भी खोल कर जब बाहों को
रात का वचन दे उसने फिर निराश कर दिया।
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उसकी इस अदा पर प्रकृति ने मन को मसोसा
सभी श्वेत पुष्पों ने अपने को फिर से था समेटा
हरसिंगार उदास हो,जमीं पर था बिखरा
ये शबनम की बूँदे जैसे प्रेमियों के मन की आह।
अपर्णा शर्मा
July 10th,2026
